शनिवार, 28 सितंबर 2013

चिंतन ...

कई बार ईर्ष्या करनेवाला खुद भी अनजान होता है अपनी ईर्ष्या से 
आत्मप्रशस्ति की ऊँगली थामे 
वह सही राह से गुमराह हो जाता है 
स्नेहिल द्वार बंद कर अपनी उस किस्मत को रोता है 
जिसे ख़ुदा तराशकर भी हार जाता है 
 
- रश्मि प्रभा 



मंगलवार, 27 अगस्त 2013

चिंतन ...

सच है,लक्ष्मी के संग रहकर न कोई धनवान होता है 
न विष्णु 
लक्ष्मी तो एक पैसे में भी होती है 
पर उसकी कीमत जान पाना आसान नहीं 
क्योंकि मन तो अति के मोह से भरा 
कड़वे बोल की अमीरी के नशे में धुत्त होता है !
- रश्मि प्रभा 

शनिवार, 22 जून 2013

चिंतन ...

सहनशीलता,विनम्रता,दानवीरता,हर परिस्थिति में खुश रहने की कला भी एक कर्म है,जिसका फल अन्याय के रूप में मिलता है = क्यूँ? क्योंकि अन्याय करनेवाला इस विशिष्टता को खत्म करने के हर हथकंडे अपनाता है .  प्रकृति के साथ खिलवाड़ प्रकृति का कर्म नहीं, प्रकृति मौन भुगतती है ... 
पर,प्रकृति हो या मनुष्य - उसके साथ किये गए अन्याय का प्रतिकर्म उसकी प्रतिध्वनि,स्वतः मुड़ती है -


- रश्मि प्रभा

बुधवार, 29 मई 2013

चिंतन ...

जो आत्महत्या कर लेते हैं 
वे मर जाने की धमकी नहीं देते 
वह एक क्षण का घना सन्नाटा होता है 
जिस सन्नाटे में मरनेवाला सारे कर्तव्य अधिकार भय से परे होता है .... 
- रश्मि प्रभा 

मंगलवार, 21 मई 2013

चिंतन ...

सत्य वह नहीं जो हम जीते हैं ..... 
सत्य वह है जिसे हम चाहकर भी नहीं जी पाते !!

- रश्मि प्रभा 

शुक्रवार, 10 मई 2013

चिंतन ...

आलोचना करना भी अद्भुत असाधारण क्षमता है 
आवेशित,आक्षेपित मार्ग से अलग सही ढंग से सही-गलत को 
प्रस्तुत करना सबके वश की बात नहीं ! 
 
- रश्मि प्रभा 


बुधवार, 1 मई 2013

चिंतन ...

लड़ने से या दोषारोपण से 
हम कोई हल नहीं निकाल पाते 
सिवाय क्षणिक जीत के सिवा 
सहेजने को कुछ नहीं होता ...

- रश्मि प्रभा