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सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

संस्कार नहीं बनाना है .....

बहुत आसान लगता है बुराई करना पर एक

अदृश्य तिलस्मी जाल की तरह वह और अन्दर

आने को प्रेरित करता जाता है और पीछे लौटने

के सारे रास्ते स्वतः बन्द हो जाते हैं बुराई को

संस्कार नहीं बनाना है , बस फुफकारना भर है ....

गुरु जी कहते हैं - ' भक्ति से शक्ति फिर खुद

से युक्ति और हमेशा की मुक्ति ...........।


- सुमन सिन्‍हा

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

संयम ....

विवेक संयम है , ठहराव है ...

हमारे अप्रत्यक्ष को सुनने

समझने और जानने की

सूक्ष्म स्थिति है ...।

- सुमन सिन्‍हा

सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

बुराई ...

बुराई ताकतवर दिखती है ज़रूर, पर

उसी दिन तक जब तक उसके

सामने कोई खड़ा न हो जाये !

- सुमन सिन्‍हा


मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

'' परिणाम ''

महाभारत और गीता आज भी सत्य हैं, क्योंकि उसमें

हर तरह की बुराई दिखाई गई है, जिससे आम इन्सान

उसमें शामिल होने से पहले परिणाम सोच ले ..........।


- सुमन सिन्‍हा

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

प्यार समर्पण .... ईश्वरीय गुण हैं ...

प्यार समर्पण .... ईश्वरीय गुण हैं ...

सब को इनका आशीर्वाद नहीं . अन्दर से जब हम

खाली होते हैं तभी हमारी पात्रता निर्मित होती है

और ईश्वर हमारे अन्दर इसे भरते जाते हैं ....

अवगुण सहज आते हैं पर दैविक आग पर चलकर

अपना अस्तित्व भूलने पर हम देव वाणी बन जाते हैं ...।

- सुमन सिन्हा