बुधवार, 13 मार्च 2013

चिंतन ...

किताब में,पत्रिकाओं में होने की इच्छा होना .... कोई हास्यास्पद बात नहीं
यह तो एक परिधान है - जिसके अंतर्गत सौन्दर्य बढ़ जाता है !
 - रश्मि प्रभा

7 टिप्‍पणियां:

  1. सत्य वचन ! सुंदर एवँ नयनाभिराम परिधानों से सुसज्जित होना कौन नहीं चाहेगा !

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  2. अगर काबिलीयत हो तो ....... !!
    शुभकामनायें !!

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  3. तभी कोई पहचान भी बनती है .... सही बात

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यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...