बुधवार, 25 जुलाई 2012
कोई शुरूआत जब गलती से हो तो समझाने से बेहतर है
आप सामनेवाले की बात सुनें
उसके क्रोध को भी स्वीकार करें - तब अनचाहा नहीं होता
- रश्मि प्रभा
सोमवार, 16 अप्रैल 2012
प्रेम में ही ...
प्रेम है प्रभु या प्रभु है प्रेम में
प्रेम में ही ज्ञान है प्रेम में ही सार है
समर्पण मुक्ति है .......
- रश्मि प्रभा
सोमवार, 9 अप्रैल 2012
चाटुकारिता का तर्पण ....
जिसकी आत्मा मरी होती है
उसके विरुद्ध कोई समाज परिवार नहीं होता
बल्कि सभी मरी आत्मा के साथ चलने लगते हैं
चाटुकारिता का तर्पण अर्पण करते हैं
- रश्मि प्रभा
सोमवार, 2 अप्रैल 2012
मंथन हर पहलू का ...
आत्मचिंतन यानि अपने भीतर मंथन हर पहलू का ...
और मंथन के लिए जगह ही नहीं !
- रश्मि प्रभा
गुरुवार, 29 मार्च 2012
प्रेम , ख्याल , इंतज़ार
क्रोध सबकुछ ख़त्म कर देता है -
प्रेम , ख्याल , इंतज़ार ..... चेहरे की मुस्कान
- रश्मि प्रभा
शनिवार, 24 मार्च 2012
गंगा बनते लोग ....
बाह्य परिवेश में गंगा बनते लोग
व्यक्तिगत रूप में फल्गु होते हैं या ज्वालामुखी ...
- रश्मि प्रभा
मंगलवार, 20 मार्च 2012
अनुभवों की पैनी धार
अनुभवों की पैनी धार ही बरगद को खड़ा करती है
चिड़िया चोंच मारे पथिक उठकर चल दें
अस्तित्व बरगद का कभी मिटता नहीं है ....
- रश्मि प्रभा
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