मंगलवार, 3 मई 2011

आंतरिक छवि ...

अपनी बाह्य छवि को बचाए रखने के कदम
आंतरिक छवि को धूमिल करते जाते हैं ...!!

- रश्मि प्रभा

6 टिप्‍पणियां:

  1. ये बात आपने सोलह आने सही कही है दीदी ...

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  2. गहरा गोता लगाकर लाया गया मोती!!

    जीवन की मनोदशा का यथार्थ!!

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    सुज्ञ: ईश्वर सबके अपने अपने रहने दो

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  3. दीदी क्या आपका ये संकेत दोहरी छवियों वाले समझेंगे भी ???
    जल में कुम्भ कुम्भ में जल है बाहर भीतर पानी
    फूटा कुम्भ जल जलहि समाना,यहु तत कहौ गियानी ..
    आपका और कबीर दोनों का संकेत एक है दीदी ....काश हम थोड़ा और गहरे डूबते !

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  4. कई बार,बाहरी प्रयासों से भीतर भी सुधार होता है। सब कुछ निर्भर इस पर करता है कि जड़ता कितनी कम अथवा ज़्यादा है।

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यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...