बुधवार, 10 सितंबर 2014

चिंतन ...

तुम अगर खुले मन से किसी की प्रशंसा नहीं कर सकते,
तो कोई तुम्‍हारी कितनी भी प्रशंसा कर ले - तुम उस योग्‍य नहीं.

- रश्मि प्रभा 

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर ...
    नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!

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