शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

मोह से परे ...

जो मोह से परे खुद को सोचते हैं , वे बहुत कुछ हासिल करके भी गरीब होते हैं
ज़िन्दगी शब्दों में वहीँ नमी पाती है - जो आकंठ मोह में डूबे काँटों पर चलते हैं !
- रश्मि प्रभा

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया |
    बधाई ||
    http://dineshkidillagi.blogspot.com/

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  2. sahi kaha mausi ji....lekin moh se upja dukh ...kab tak aur kitna jhela ja sakta hai...ek anuttarit sa prashn....aabhar

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