शनिवार, 1 अक्तूबर 2011

फर्क ....

पूरी ज़िन्दगी हम कहते कुछ हैं
पर जब करने की बारी आती है
तो 'मैं ' की गिरफ्त में परेशानियों का चक्रव्यूह बनाते हैं
महारथी बने हम .... खुद को बेरहमी से मार देते हैं
और रोनेवाला ढूंढते हैं ....

- रश्मि प्रभा

6 टिप्‍पणियां:

  1. कहाँ से लातीं हैं आप इतने गहरे महत्वपूर्ण विचार करने योग्य विचार....

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  2. अकर्मण्यता के बहाने का सटीक चक्र्व्यूह!!

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यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...