बुधवार, 13 अप्रैल 2011

ईश्वर का आशीष ....

अन्धेरा ईश्वर का आशीष है
अँधेरे के बीच ही इन्सान प्रकाश लाने को तत्पर होता है ...!!


- रश्मि प्रभा

10 टिप्‍पणियां:

  1. अँधेरा हमेशा रौशनी की तलाश के लिए उकसाता है.
    सूरज को छोड़िये,वह चाँद -तारों के सहारे भी आगे बढ़ जाता है.
    दीदी बहुत सुंदर उक्ति है

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  2. अँधेरे के बाद ही उजाला है
    सब इसी में सिमटा हुआ है

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  3. Aur yeh Aashirwaad hi aage badhne ki prerna deta hai..
    Jivan main Kya baadha hai, jab tera sang hai, chaahe ho raat ya sabera...!

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  4. ये दोनो ही रंग एक दूसरे के होने की अनुभूति कराते हैं !

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  5. अँधेरा ही प्रकाश के महत्त्व को बताता है ..

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  6. दुखों की अनुभूति के बिना सुखो का सच्चा आनंद अनुभूत नहीं होता।

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  7. एकदम सही। दुख की अनुभूति हुये बगैर मानव सुख सही मायने मे क्या है यह कैसे जान सकता है। अच्छी सूक्ति।

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  8. vipareet halaton men hi anukool ki khoj hoti hai aur usake mahatva ko samajh ja sakata hai.

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