सोमवार, 25 जुलाई 2011

सही होकर भी ....

खूनी प्रवृति को कभी पश्चाताप नहीं होता ,
पर क्षण विशेष में - प्रत्युत्तर में दी गई गाली , उठाया हुआ हाथ -
अपने अन्दर सही होकर भी मरता रहता है !


- रश्मि प्रभा

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर विचार के साथ आत्म-चिंतन को प्रस्तुत किया है आपने /बधाई आपको /

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  2. बहुत बढ़िया !उत्तम विचार!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com

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  3. sahi kaha jo hamare liye sahi ho vo jaruri nahi samne vale ke vichar se bhi sahi ho...

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यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...