शनिवार, 23 अगस्त 2014

चिंतन ....

आत्‍मा ही परमात्‍मा है, 
उसी से मिलती है सहनशीलता..... वही दिशा देता है

- रश्मि प्रभा 

6 टिप्‍पणियां:

  1. सच में .... जमीर की सुनें तो कभी गलतियाँ ना हो

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  2. विडम्बना ही तो है कि बाहरी शोर से ही इंसान इतना ग्रस्त है कि आत्मा की आवाज़ उसे सुनाई देती ही नहीं है !

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  3. सहनशीलता जीवन में निराश नहीं होने देती .

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यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...