शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

चिंतन ....

जहाँ रक्‍त सम्‍बंध होते हैं, 
वहाँ बड़े से बड़े अपराध को लोग न चाहकर भी अनदेखा कर देते हैं
क्‍योंकि उससे कई रिश्‍ते जुड़े होते हैं
बात दूसरों की हो तो हमसब न्‍यायधीश बन जाते हैं.

- रश्मि प्रभा 

3 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 01/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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