मंगलवार, 27 सितंबर 2011

प्‍यार ...

प्यार की न आलोचना हो सकती है न समालोचना
प्यार किसी भी खेल में किसी भी मंच पर हार जीत के लिए नहीं खड़ा होता ...!!!


- रश्मि प्रभा

4 टिप्‍पणियां:

  1. हो भी नहीं सकता। क्यूंकि प्यार कि कोई परिभाषा ही नहीं होती। :)

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  2. बहुत सुन्दर ||

    मनभावन प्रस्तुति पर बधाई ||

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