सोमवार, 15 अप्रैल 2013

चिंतन ...

अगर हम निराशा को ही सर्वस्व मान लें 
तो असंख्य रश्मियाँ भी रास्तों के अँधेरे नहीं मिटा सकती 
पर खुद पर भरोसा कर लें 
तो एक किरण भी काफी है ....
 
- रश्मि प्रभा
 

बुधवार, 3 अप्रैल 2013

चिंतन ...

जो अकबका कर तुमसे व्यक्तिगत बात कह जाये,
उसे किसी और से कहना तुम्हारे व्यक्तित्व को हल्का करता है ...

- रश्मि प्रभा 

बुधवार, 20 मार्च 2013

चिंतन ...

ज़िन्दगी उलझती,टूटती पैबन्दों के संग चलती है 
बिना सलवटों की ज़िन्दगी भी भला ज़िन्दगी होती है !

- रश्मि प्रभा 

बुधवार, 13 मार्च 2013

चिंतन ...

किताब में,पत्रिकाओं में होने की इच्छा होना .... कोई हास्यास्पद बात नहीं
यह तो एक परिधान है - जिसके अंतर्गत सौन्दर्य बढ़ जाता है !
 - रश्मि प्रभा

मंगलवार, 5 मार्च 2013

चिंतन ...

जब आप किसी को अपमानित करने का एक मौका भी नहीं खोते 
तो आपकी दिमागी हालत दयनीय है ..... और लाइलाज भी

- रश्मि प्रभा

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

चिंतन ...

शक एक बीमारी है 
इसमें न घरेलु इलाज सम्भव है 
न योगा,न पूजा, न प्यार ...... शक के कीड़े हर जगह रेंगते रहते हैं
 
- रश्मि प्रभा


शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

चिंतन ...

वो तलवार लेकर निकले हैं खुद को ताकतवर समझ के 
और हम हैरां हैं उनकी जंग खाई तलवार को देख के !!

- रश्मि प्रभा