शुक्रवार, 1 मार्च 2013

चिंतन ...

शक एक बीमारी है 
इसमें न घरेलु इलाज सम्भव है 
न योगा,न पूजा, न प्यार ...... शक के कीड़े हर जगह रेंगते रहते हैं
 
- रश्मि प्रभा


6 टिप्‍पणियां:

  1. इसका इलाज तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं था ....यह दीमक है ...भयंकर प्रजाति की ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बिलकुल सत्य वचन ! शक के कीड़ों ने हरे भरे घर बर्बाद कर दिए और लोगों का जीवन नर्क बना दिया !

    उत्तर देंहटाएं

  3. डॉ जाकिर भाई विज्ञान कथा ,विज्ञान बाल गल्प का स्वरूप अभी निर्धारित नहीं हो पाया है फ्लक्स में है .आपने गफलत कम की है इस इलाके में पसरी हुई .असल मकसद विज्ञान संचार ही है कथा की मार्फ़त ,बेशक रोचक बनाए रखना भी ज़रूरी है .आपने विस्तृत विवेचना की है इसके इतिहासिक और वर्तमान विकासमान स्वरूप की .विज्ञान गल्प लिखने के लिए अभिनव प्रोद्योगिकी की जानकारी रखना एहम बात है .उडन तस्तरियाँ और येती हमेशा ही प्रासंगिक बने रहते हैं बर्मूडा त्रिकौन भी .

    उत्तर देंहटाएं
  4. जहां शक हो वहां विश्वास कहां .

    उत्तर देंहटाएं
  5. और यह बीमारी कहीं न कहीं सबको होती है :):)

    उत्तर देंहटाएं

यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...