बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

चिंतन ...

बराबरी की चर्चा करते करते हमसब अपनी वास्तविक छवि से दूर हो गए. 
प्रश्न,समस्या से परे - तार्किक जिद्द ने 
दूसरी समस्या उत्पन्न कर दी है समाज में ... 
आधुनिकता - परिपक्व,दिशा निर्धारित सोच से संबंध रखती है, 
जो मार्ग अवरुद्ध कर दे उसे कपड़े और चाल से आधुनिकता नहीं कह सकते .

- रश्मि प्रभा

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

चिंतन ...


साथ चलते हुए बातें स्पष्ट हों - सही है, ज़रूरी भी .... 
पर हर रिश्ते में कुछ स्पेस होना चाहिए .

- रश्मि प्रभा 

शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

चिंतन ...


जब हम सच कहते हैं तो यह क्यूँ कहते हैं कि 
'मेरा नाम ना आए' या बेनामी बनकर उतरते हैं - 
नकाब हो तो सच कैसा ! 

- रश्मि प्रभा 

बुधवार, 26 सितंबर 2012

चिंतन ...

जीवन में जो होता है , उससे व्यक्ति नाखुश रहता है 
जो नहीं होता उसके लिए बडबडाता रहता है ... 

- रश्मि प्रभा 

सोमवार, 24 सितंबर 2012

चिंतन ...

नारी - सीता भी , राधा , मीरा , सावित्री ...... भी 
नारी ही शूर्पनखा , पूतना , होलिका , मन्थरा ...... 
जब सीता के लिए हम लिखते हैं तो पूतना का विरोध - हास्यास्पद होगा न !

- रश्मि प्रभा 

शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

चिंतन ...

किसी बात पर असहमति का अर्थ यह नहीं कि बम ही फोड़ा जाए ...
और बहरों के आगे बम फोड़ने से भी क्या हासिल होगा !

- रश्मि प्रभा 

बुधवार, 19 सितंबर 2012