शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

चिंतन ...


जब हम सच कहते हैं तो यह क्यूँ कहते हैं कि 
'मेरा नाम ना आए' या बेनामी बनकर उतरते हैं - 
नकाब हो तो सच कैसा ! 

- रश्मि प्रभा 

6 टिप्‍पणियां:

  1. सच में इन तीन पंक्तियो को
    समझाए कौन

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  2. कुछ शब्दों में बहुत कुछ कह दिया...

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  3. नकाब हो तो सच कैसा
    .....बहुत कुछ कह दिया

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  4. बेनामी व नाम छुपाने मेँ कुटिलता से असत्य को सत्य के रूप मेँ परोसा जाता है.

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  5. कहते हैं कि साँच को आँच नहीं पर सबसे ज्यादा आँच साँच को ही आती है इसलिए शायद ऐसा होता है. हिम्मत की जाए तो इस नकाब को उतारा जा सकता है. बहुत गहन सोच, शुभकामनाएँ.

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