शनिवार, 24 नवंबर 2012

चिंतन ...

खिलखिलाती हंसी की तलाश कैसी 
सन्नाटा ही चेहरे पर बाकी है , ये क्या कम है
- रश्मि प्रभा 

4 टिप्‍पणियां:

  1. हमें खिलखिलाती हँसी की ही तलाश है दी, प्लीज़ हँसिए नः)

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  2. हम्म.... पर सन्नाटा क्यों ? हंसी नहीं तो क्रोध हो ...खीज हो .... :):) अब मुस्कुराइए ।

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  3. आज के हालात में इससे ज्यादा की आशा व्यर्थ है...

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  4. सन्नाटा खिलखिलाती हंसी के स्वागत के लिये ज़मीन ही तो तैयार करता है !

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