गुरुवार, 1 नवंबर 2012

चिंतन ..

अहंकार में प्रेम कहाँ ! 
प्रेम तर्कों में उलझ जाए,स्पष्टीकरण देने लगे-तो वह प्रेम होता ही नहीं. 
प्रेम करनेवाला अपनी अनुभूतियों को किसी कसौटी पर नहीं रखता !!

- रश्मि प्रभा


2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ..
    मानव कल्‍याण के लिए चिंतन आवश्‍यक है

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  2. प्रेम में न स्वार्थ होता है न अहंकार । प्रेम तो प्रेम होता है जो टूट कर किया जाता है ।

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