शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

चिंतन ...

निहत्थे शक्तिहीन से युद्ध उचित नहीं - ऐसा शास्त्रों में कहा  है 
तो स्त्री के साथ जो अन्यायी युद्ध होता है , 
वह सिद्ध करता है कि उसमें अपार क्षमता है 
पति और बच्चों से बढकर कोई शस्त्र नहीं 
और यदि वह इन अवश्यम्भावी शस्त्रों से विहीन है 
तो इसके बगैर भी उसकी आत्मिक शक्ति उसके लिए शिव धनुष के समान है 
अबला ना वह कभी थी ना है ना होगी ...
- रश्मि प्रभा

4 टिप्‍पणियां:

  1. अबला है न थी कभी, शक्ति रूप सन्तान |
    सदा आत्मिक-शक्ति शिव, साधे धनुष महान ||

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  3. शुक्रवार, 30 नवम्बर 2012
    चिंतन ...
    निहत्थे शक्तिहीन से युद्ध उचित नहीं - ऐसा शास्त्रों में कहा है
    तो स्त्री के साथ जो अन्यायी युद्ध होता है ,
    वह सिद्ध करता है कि उसमें अपार क्षमता है
    पति और बच्चों से बढकर कोई शस्त्र नहीं
    और यदि वह इन अवश्यम्भावी शस्त्रों से विहीन है
    तो इसके बगैर भी उसकी आत्मिक शक्ति उसके लिए शिव धनुष के समान है
    अबला ना वह कभी थी ना है ना होगी ...

    बढ़िया प्रस्तुति निश्चय है धूप ताप सहने की क्षमता भी इस सबला की ज्यादा है .

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  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (1-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...