शुक्रवार, 24 जून 2011

बिकता है ...

हर आदमी बिकता है ...
कोई पैसे के लिये
कोई इज्‍ज्‍त के लिये, कोई प्‍यार के लिये ....


- रश्मि प्रभा

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपके ही सौजन्य से

    आभार ||



    बिकता है हर आदमी, भिन्न-भिन्न है दाम |
    सच्चा मोल चुकाय वो, पड़ता जिसको काम ||

    पड़ता जिसको काम , खरीदे देकर पैसा |

    करता न सम्मान, करे बदनाम हमेशा |

    पर रविकर यदि प्यार, ख़रीदे तुम्हें तोल के -

    बिक जाना तुम यार, वहाँ पर बिना मोल के ||

    उत्तर देंहटाएं
  2. :):) प्यार के लिए समर्पित हो जाता है ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. क्या बात है ..वैसे संगीता जी सही कह रही है !

    उत्तर देंहटाएं
  4. सही कहा, हर चीज बिकती है। मोल का विनिमय अलग अलग होता है।
    प्यार में 'अपनत्व' 'समर्पण' के मोल बिकता है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सही ...बिक जाता है कोई कौड़ियों के मोल ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बिकता बिकता आदमी
    बहुत सही बात कही है

    उत्तर देंहटाएं

यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...