शुक्रवार, 3 जून 2011

मंथन में अमृत ....

ईश्वर ने मंथन में अमृत लिया और उसके लिए पूरी सूझबूझ अपनाई
यदि हम तब भी नहीं सीखते तो यह हमारी नियति नहीं
स्वनिर्मित दुर्भाग्य है ....


- रश्मि प्रभा

12 टिप्‍पणियां:

  1. सटीक कहा है आपने! बढ़िया प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

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  2. बिल्कुल सही कहा आपने, ये स्वनिर्मित दुर्भाग्य पर हम खुद ही रोते हैं.

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  3. स्वनिर्मित दुर्भाग्य, सत्य!!

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  4. स्व निर्मित दुर्भाग्य ही तो है , लोक कथाओं से शिक्षा न लेना

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यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...