शनिवार, 23 अगस्त 2014

चिंतन ....

आत्‍मा ही परमात्‍मा है, 
उसी से मिलती है सहनशीलता..... वही दिशा देता है

- रश्मि प्रभा 

शनिवार, 9 अगस्त 2014

चिंतन ....

स्‍त्री की भूमिका, उसका महत्‍व गौर करें,
सृजन की अधिकारिणी
बच्‍चे के मुख से नि:सृत पहला स्‍वर – माँ
किवदंतियाँ जो हमने ही गढ़ी - जब हम कहते हैं गोदी के बच्‍चे से कि
‘‘माँ का डाँटे’’  तो वह रोने सा मुँह बनाता है
‘‘पापा को डाँटे’’ तो वह हँसता है ... 
इस हास्‍य को बनाने के पीछे कोई तो सोच होगी
विद्या रूप
लक्ष्‍मी रूप
शक्ति रूप
सहनशीलता की अद्भुत मिसाल – 
सीता ने लव-कुश को वन में राजकुल योग्‍य बनाया !
पत्‍थर बनी अहिल्‍या ने राम का इन्‍तज़ार किया
यशोधरा ने राहुल को तैयार किया
राधा ने नाम स्‍वीकार किया
.............................. एक गहन अस्तित्‍व


-                  - रश्मि प्रभा 


सोमवार, 30 जून 2014

चिंतन

तूफ़ान की तरह उठापटक करते आते हैं विचार,
मन के दरवाज़े को पीटते हैं 
मस्तिष्‍क के कोनों से कई ख्‍याल उड़ा ले जाते हैं
जब तक वेग रूकता है
............. एक सन्‍नाटा होता है
और उस सन्‍नाटे की सोच अलग होती है उस तूफ़ान से 

- रश्मि प्रभा 

शुक्रवार, 20 जून 2014

चिंतन ....

किसी के आगे इतना मत झुको कि अपनी पहचान न रहे,
न ही किसी को इतना झुकाओ कि तुम तानाशाह लगने लगो .... 


- रश्मि प्रभा 

मंगलवार, 10 जून 2014

चिंतन ....


यही इंगित बड़ी बात है कि जिस पेड़ पर अधिक फल होते हैं .... 
पत्‍थर उसी पर बरसते हैं
पत्‍थर ही आपके प्राप्‍य का मेडल है :)

- रश्मि प्रभा







रविवार, 1 जून 2014

चिंतन ...

किसी की प्रगति यदि हज़म हो जाए
फिर कॉम्पिटिशन ही नहीं रह जाए ।

- रश्मि प्रभा 

शनिवार, 24 मई 2014

चिंतन .....


मज़ाक करना आसान होता है,
मज़ाक सहना नामुमकिन !
-                                                                     रश्मि प्रभा  

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