शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2012

चिंतन ...

काया-नश्वर
आत्मा-अमर

पर काया के भौतिक मोह में आत्मा हो जाती है नश्वर


- रश्मि प्रभा 

बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

चिंतन ...

जो पल पल तुम्हारे ज़ख्म सहलाता है,साथ के नारे लगाता है - 
वह व्यक्ति अधिक खतरनाक होता है 

- रश्मि प्रभा 

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

चिंतन ...

न कोई आस्तिक,न नास्तिक-ईश्वर तो दोनों में है
स्वीकारो,नकारो- क्या फर्क पड़ता है 
एक तर्क तो एक कुतर्क 
एक प्राप्य तो दूसरा अप्राप्य का प्रतीक
कारण निर्धारित !

- रश्मि प्रभा 

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

चिंतन ...

माँ एक खाली कुआं है - जिसमें जीवन के सारे हल तैरते हैं 

- रश्मि प्रभा 


गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

चिंतन ...

श्रेष्ठ वह है जो सच के साथ अडिग रहे .... 
छुपकर वार वही करते हैं जो झूठ की बैसाखियों पर होते हैं 

- रश्मि प्रभा 

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

चिंतन ...

कोई भी व्यक्ति , घटनाक्रम, .... 
पूरी तरह तरह से सही नहीं होता , हो ही नहीं सकता - 
क्योंकि कहने सुनने समझने और लेने में अपनी सोच भी शामिल होती है....

- रश्मि प्रभा 

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2012

चिंतन ...

शब्द हमारी असलियत हैं ... 
असलियत यदि खो जाए  तो शब्द खुद ब खुद खोटे हो जाते हैं 

- रश्मि प्रभा