शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012
कुँए में पनपती सोच .....
कुँए को नियति बना जो दुनियादारी दिखाते हैं , वे किसी को नहीं समझते
क्योंकि उनकी सोच कुँए तक ही होती है
पर जो कुँए से बाहर निकल गहरी सांस लेते हैं
उनको पता होता है कुँए में पनपती सोच कैसी होती है !
- रश्मि प्रभा
मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012
कठिनाईयों से डर कैसा ?
कठिनाई ना हो तो मकसद ना हो
मकसद ना हो तो रास्ते नहीं, रास्ते नहीं तो मंजिल नहीं
.. तो कठिनाईयों से डर कैसा ?
- रश्मि प्रभा
बुधवार, 1 फ़रवरी 2012
वादा करना रुद्राभिषेक है ....
किसी से वादा करना रुद्राभिषेक है
शिव का दुग्ध स्नान ...
लोगों ने इसे स्वर्ण मृग बना दिया !
- रश्मि प्रभा
रविवार, 29 जनवरी 2012
असली नहीं लगते ..
जब हम मुखौटों में जीने लगते हैं,
तो असली चेहरे भी असली नहीं लगते ...
- रश्मि प्रभा
सोमवार, 23 जनवरी 2012
चिंगारी से कम नहीं ...
कभी शब्द छोटे-छोटे नज़र आते हैं,
पर इनके मायने
राख के ढेर में दबी चिंगारी से कम नहीं ...
- रश्मि प्रभा
शुक्रवार, 20 जनवरी 2012
सब गुरू बन जाते हैं ....
हत्या चोरी झूठ की परिभाषा सब जानते हैं,
चश्मदीद गवाह बदल जाते हैं
पर किसी मासूम की भूख से बेपरवाह
सब गुरू बन जाते हैं ....
- रश्मि प्रभा
बुधवार, 18 जनवरी 2012
अपनी नज़र ...
यदि अपनी नज़र में सही होना था,
तो हम आपके अपने कभी नहीं होते ..
- रश्मि प्रभा
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