रविवार, 29 जनवरी 2012

असली नहीं लगते ..

जब हम मुखौटों में जीने लगते हैं, 
तो असली चेहरे भी असली नहीं लगते ...

- रश्मि प्रभा

10 टिप्‍पणियां:

  1. vaah bahut sachchi baat kahi hai jab khud mukhaute pahan kar rahte hain to doosron ki sachchaai par shaq karte hain....aksar yahi hota hai.

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  2. ji rashmi mam. aisa hi hota hai, jab ham khud jhuth bolate hai to hame sabme jhuta hi dikhata hai..

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  3. कल 30/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. एक दम सच्ची कहा दी....
    हम झूठे तो जग झूठा...

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  5. कैसे जी लेते है , मुखौटे लगा के लोग ,
    लेकिन ,
    गीदड़ नील में रंग कर शेर कितने दिन तक..... ?

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  6. aslee chehraa dekhne ke liye
    taras rahaa hoon
    mukhoton kaa ab itnaa aadee ho gayaa hoon
    aslee dikh bhee jaaye to pahaachaanoongaa nahee

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