बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

कल्‍पना से यथार्थ ....

यथार्थ से कल्‍पना तक जाना संभव नहीं,

कल्‍पना से यथार्थ तक जाना अनुभव का

संवेदनशील मार्ग है ...........।

- रश्मि प्रभा


6 टिप्‍पणियां:

  1. दीदी प्रणाम !
    सही है . बस योग्य सकती हो इच्छा शक्ति हो तो क्या मुमकिन नहीं .
    सादर

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  2. वाह!! साकार होने पर सपने नहीं होते, सपने साकार हो सकते है।

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  3. यथार्थ मे ही तो आदमी कल्पनायें ढूँढता है और नये यथार्थ की शुरूआत करता है। इस तरह यथार्थ और कल्पनाओं का चोली दामन का साथ है।

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यह प्रेरक विचार आपके प्रोत्‍साहन से एक नये विचार को जन्‍म देगा ..
आपके आगमन का आभार ...सदा द्वारा ...