सोमवार, 30 जुलाई 2012

बुद्धि, विवेक के साथ क्रोधयुक्‍त जिद हो तो ... तो होनी काहू बिधि न टरै 

- रश्मि प्रभा

शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

  • सत्‍य को कोई सह नहीं पाता - झूठ की बैसाखियों पर चलने वाले पांव इतने लाचार होते हैं कि यथार्थ की धरती पर खड़े नहीं हो सकते, जो सच सामने आता है, उसके पीछे कई सच होते हैं - जिनको न कोई सामने लाना चाहता है, न कोई सुनना चाहता है, अपनी डफली अपना राग उत्‍तम है.

          - रश्मि प्रभा 


बुधवार, 25 जुलाई 2012

  • कोई शुरूआत जब गलती से हो तो समझाने से बेहतर है
      आप सामनेवाले की बात सुनें
      उसके क्रोध को भी स्‍वीकार करें - तब अनचाहा नहीं होता 

        - रश्मि प्रभा

सोमवार, 16 अप्रैल 2012

प्रेम में ही ...

प्रेम है प्रभु या प्रभु है प्रेम में
प्रेम में ही ज्ञान है प्रेम में ही सार है
समर्पण मुक्ति है .......

- रश्मि प्रभा 

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

चाटुकारिता का तर्पण ....

जिसकी आत्मा मरी होती है
उसके विरुद्ध कोई समाज परिवार नहीं होता
बल्कि सभी मरी आत्मा के साथ चलने लगते हैं
चाटुकारिता का तर्पण अर्पण करते हैं

- रश्मि प्रभा

सोमवार, 2 अप्रैल 2012

मंथन हर पहलू का ...

आत्मचिंतन यानि अपने भीतर मंथन हर पहलू का ...
और मंथन के लिए जगह ही नहीं !

 - रश्मि प्रभा

गुरुवार, 29 मार्च 2012

प्रेम , ख्याल , इंतज़ार

क्रोध सबकुछ ख़त्म कर देता है - 
प्रेम , ख्याल , इंतज़ार ..... चेहरे की मुस्कान

- रश्मि प्रभा