यथार्थ से कल्पना तक जाना संभव नहीं,
कल्पना से यथार्थ तक जाना अनुभव का
संवेदनशील मार्ग है ...........।
- रश्मि प्रभा
यथार्थ से कल्पना तक जाना संभव नहीं,
कल्पना से यथार्थ तक जाना अनुभव का
संवेदनशील मार्ग है ...........।
- रश्मि प्रभा
बहुत आसान लगता है बुराई करना पर एक
अदृश्य तिलस्मी जाल की तरह वह और अन्दर
आने को प्रेरित करता जाता है और पीछे लौटने
के सारे रास्ते स्वतः बन्द हो जाते हैं। बुराई को
संस्कार नहीं बनाना है , बस फुफकारना भर है ....
गुरु जी कहते हैं - ' भक्ति से शक्ति फिर खुद
से युक्ति और हमेशा की मुक्ति ...........।
- सुमन सिन्हा
विवेक संयम है , ठहराव है ...
हमारे अप्रत्यक्ष को सुनने
समझने और जानने की
सूक्ष्म स्थिति है ...।
- सुमन सिन्हा
जब हम धरा से वृक्ष, फूल पौधों के नामोनिशां
हटा देंगे तो बसंत आकर भी क्या करेगा !