बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

कल्‍पना से यथार्थ ....

यथार्थ से कल्‍पना तक जाना संभव नहीं,

कल्‍पना से यथार्थ तक जाना अनुभव का

संवेदनशील मार्ग है ...........।

- रश्मि प्रभा


मंगलवार, 22 फ़रवरी 2011

सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

संस्कार नहीं बनाना है .....

बहुत आसान लगता है बुराई करना पर एक

अदृश्य तिलस्मी जाल की तरह वह और अन्दर

आने को प्रेरित करता जाता है और पीछे लौटने

के सारे रास्ते स्वतः बन्द हो जाते हैं बुराई को

संस्कार नहीं बनाना है , बस फुफकारना भर है ....

गुरु जी कहते हैं - ' भक्ति से शक्ति फिर खुद

से युक्ति और हमेशा की मुक्ति ...........।


- सुमन सिन्‍हा

शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

ईश्‍वर ने ....

जब हर तरफ अँधेरा हो, साँसें तक अवरुद्ध हों ...........
समझ लो ईश्वर ने तुम्हारे मार्ग बनाने शुरू कर दिए हैं !


- रश्मि प्रभा

शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

संयम ....

विवेक संयम है , ठहराव है ...

हमारे अप्रत्यक्ष को सुनने

समझने और जानने की

सूक्ष्म स्थिति है ...।

- सुमन सिन्‍हा

गुरुवार, 17 फ़रवरी 2011

विनम्र और सभ्‍य ....

विनम्र और सभ्‍य उतना ही होना चाहिए जब तक
सामने वाला उसे हमारी कमजोरी ना समझने लगे,
कोई हमें केंचुआ ना समझे, बस इतना याद रखना है
केंचुएं को छोटे बच्‍चे तक उठा कर फेंक देते हैं लोग...
पर कोबरा को ???



- इंदु पुरी

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

धरा से ....

जब हम धरा से वृक्ष, फूल पौधों के नामोनिशां

हटा देंगे तो बसंत आकर भी क्या करेगा !


-रश्मि प्रभा